सेमीकॉन 2.0: चिप से फुल-स्टैक इकोसिस्टम तक भारत की छलांग
नई दिल्ली : भारत के सेमीकंडक्टर मिशन ने अब अगले चरण में प्रवेश कर लिया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान ‘सेमीकॉन 2.0’ के कार्यान्वयन दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल देश में कुछ सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयां स्थापित करना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री, अनुसंधान, प्रतिभा और सप्लाई चेन तक एक संपूर्ण फुल-स्टैक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है।
वैष्णव के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 के तहत पूरे इकोसिस्टम में लगभग ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इन निवेशों के अगले दो से तीन वर्षों में जमीन पर उतरने की संभावना है और इससे लगभग 1 लाख नए रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। कंपनियां अपने बोर्ड एवं शेयरधारकों से मंजूरी के बाद निवेश की औपचारिक घोषणाएं करेंगी।
सेमीकॉन 1.0 की नींव पर सेमीकॉन 2.0 का विस्तार
वैष्णव ने कहा कि सेमीकॉन 1.0 का मूल उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की नींव रखना था। अब सेमीकॉन 2.0 के माध्यम से इस आधार को व्यापक बनाते हुए पूरी वैल्यू चेन में भारतीय क्षमताओं को विकसित किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए छह प्रमुख स्तंभ तय किए हैं।
पहला स्तंभ—डिजाइन इकोसिस्टम: सरकार का लक्ष्य 200 सेमीकंडक्टर डिजाइन स्टार्टअप्स को समर्थन देना है। पहले चरण में सहायता प्राप्त 105 स्टार्टअप्स में से 20 को वेंचर कैपिटल फंडिंग मिल चुकी है। अब चिप डिजाइन के साथ सिस्टम डिजाइन की क्षमताओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
दूसरा स्तंभ—मशीन एवं सामग्री: सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण, मशीनों, गैस, रसायन और अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियों के घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने पर भी जोर है।
तीसरा स्तंभ—फैब: सिलिकॉन, मेमोरी, डिस्प्ले, कंपाउंड और लॉजिक जैसी विभिन्न तकनीकों में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन क्षमता का विस्तार किया जाएगा।
चौथा स्तंभ—एडवांस्ड पैकेजिंग: आधुनिक चिप्स की दक्षता और सिस्टम-लेवल प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए एडवांस्ड पैकेजिंग तकनीक में घरेलू क्षमताएं विकसित की जाएंगी।
पांचवां स्तंभ—आरएंडडी: उद्योग, सरकार और शिक्षण संस्थानों की साझेदारी से एप्लाइड रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा। उद्देश्य ऐसी तकनीकों और समाधानों का विकास करना है जिनका व्यावहारिक उपयोग उद्योग में किया जा सके।
छठा स्तंभ—टैलेंट डेवलपमेंट: अगले पांच वर्षों में 1 लाख तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। लगभग 400 विश्वविद्यालय और संस्थान पहले से चिप-डिजाइन शिक्षा से जुड़े हैं। प्रशिक्षण में उद्योग के साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, जिनमें ताइवान का ITRI भी शामिल है, की भागीदारी होगी।
धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क
सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए 11 एमओयू का आदान-प्रदान किया गया और कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने नेक्सपेरिया, फुजीफिल्म, जेएसआर कॉर्पोरेशन, BESI, सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला और गति शक्ति विश्वविद्यालय समेत विभिन्न संस्थानों के साथ सहयोग समझौते किए।
धोलेरा, गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब सप्लायर इकोसिस्टम को गति देने के लिए 363 एकड़ के वेंडर पार्क के विकास का समझौता भी महत्वपूर्ण पहल है। इसके अलावा एडवांस्ड पैकेजिंग, सामग्री के स्वदेशीकरण, सप्लाई चेन लोकलाइजेशन और तकनीकी प्रशिक्षण पर भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
छह 'चिप-इन' क्षेत्रीय केंद्रों की घोषणा
देशभर में चिप-डिजाइन सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए छह 'चिप-इन' क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई है। वहीं Intel India और NAMTECH ने एआई तथा सेमीकंडक्टर तकनीकों के लिए भविष्य की कार्यबल क्षमता विकसित करने हेतु समझौता किया है। HORIBA ने भी अपने Coach Experience Centre का उद्घाटन किया।
वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में गुणवत्ता और लागत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रमुख मानदंड बनाया गया है। भारत में स्थापित हो रही इकाइयों का लक्ष्य वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करना है।
उन्होंने कहा कि कैपिटल इक्विपमेंट, सामग्री, गैस, केमिकल, प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को देश में विकसित करने से भारत का सेमीकंडक्टर आधार और मजबूत होगा। वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए भारत में बढ़ती संभावनाएं देख रही हैं।
52 देशों की भागीदारी, 600 से अधिक कंपनियां
यशोभूमि, नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं। कार्यक्रम में 52 देशों के प्रतिनिधि, 400 से अधिक अधिकारी और 150 से अधिक वक्ता शामिल हैं। करीब 50,000 आगंतुकों के आने की उम्मीद है। छह कंट्री पैवेलियन, 12 राज्य बूथ, स्टार्टअप पैवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पैवेलियन भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमता को प्रदर्शित कर रहे हैं।
सेमीकॉन 2.0 का व्यापक लक्ष्य स्पष्ट है—भारत को केवल चिप बनाने वाला देश नहीं, बल्कि डिजाइन, तकनीक, उपकरण, सामग्री, पैकेजिंग, अनुसंधान और प्रतिभा से लैस एक संपूर्ण वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करना।