नितिन नवीन ने भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में किया बड़ा बदलाव, अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन

Rajmaya 18/8/2026
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नई दिल्ली, 18 अगस्त। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार देर शाम पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी। आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए गठित इस नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ बड़ी संख्या में नए चेहरों को भी जिम्मेदारी दी गई है। इसे संगठन में पीढ़ीगत बदलाव और सामाजिक-क्षेत्रीय संतुलन स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

नई टीम में कुल 65 पदाधिकारी शामिल किए गए हैं, जिनमें 51 नए चेहरे हैं। पार्टी ने संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव करते हुए कई वरिष्ठ नेताओं की वापसी कराई है, वहीं युवा नेतृत्व को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सबसे प्रमुख नियुक्तियों में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है, जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव की संगठन में वापसी कर उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत तथा बैजयंत जय पांडा को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

भाजपा ने अपने आईटी विभाग में भी बड़ा बदलाव किया है। लंबे समय से आईटी सेल का नेतृत्व कर रहे अमित मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को राष्ट्रीय आईटी विभाग का प्रमुख बनाया गया है। इसे पार्टी की डिजिटल रणनीति में नए दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार नई टीम के गठन में क्षेत्रीय, सामाजिक और महिला प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान दिया गया है। भाजपा के संशोधित संगठनात्मक प्रावधानों के अनुरूप महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य सामाजिक वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नई टीम की घोषणा करते हुए कहा कि यह टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संगठन को नई ऊर्जा प्रदान करेगी और विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संगठनात्मक पुनर्गठन केवल पदाधिकारियों का परिवर्तन नहीं, बल्कि भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति का संकेत भी है। नए और अनुभवी नेतृत्व के संतुलन के माध्यम से पार्टी विभिन्न राज्यों में अपने संगठन को और मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है।

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